चीन सीमा तक सड़क बनाने में जुटे श्रमिक

राष्ट्र के लिए अपना योगदान किसी भी रूप में दिया जा सकता है। सैनिक सरहदों की सुरक्षा में रात दिन मुस्तैद हैं तो सीमा क्षेत्र के लोग जवानों की सरहद तक आसान पहुंच बनाने के लिए शून्य डिग्री तापमान में सड़क निर्माण के काम में जुटे हुए हैं।उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की दो सीमांत तहसीलों धारचूला और मुनस्यारी चीन सीमा से लगी हुई है। धारचूला तहसील के अंतर्गत चीन सीमा तक घटियाबगड़-लिपूलेख सड़क तैयार हो चुकी है। मुनस्यारी तहसील में मुनस्यारी से मिलम तक 70 किमी. लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। वर्ष 2022 तक इस सड़क को पूरा करने का लक्ष्य निर्माण एजेंसी सीमा सड़क संगठन ने तय किया है।मानसून काल में भारी बारिश के चलते लगभग चार माह तक सड़क निर्माण का कार्य बाधित रहा। अब मौसम साफ है, लेकिन रात में पारा शून्य डिग्री तक पहुंच रहा है। दिन में तेज हवाओं के चलते इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, हल्का हिमपात भी क्षेत्र में हो चुका है। बावजूद इसके मजदूरों के हौंसले बुलंद हैं। लगभग 250 स्थानीय मजदूर सीमा सड़क संगठन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़क निर्माण में जुटे हुए हैं।उच्च हिमालय में बन रही इस सड़क का कार्य दो हिस्सों में चल रहा है, जिसके चलते अभी मार्ग में वाहन संचालित नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों के लिए हेलीकाप्टर से रसद पहुंचाई जा रही है। सड़क का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एसडीएम मुनस्यारी ने बताया कि मुनस्यारी-मिलम मोटर मार्ग का कार्य तेजी से चल रहा है। अभी मौसम ठीक है। बर्फवारी होने तक कार्य चलता रहेगा। मजदूरों के लिए हैलीकाप्टर से रसद पहुंचाई जा रही है। सड़क का निर्माण पूरा हो जाने के बाद धारचूला तहसील के साथ ही मुनस्यारी तहसील से भी भारत की चीन सीमा तक पहुंच आसान हो जाएगी। मिलम ग्लेशियर और मिलम क्षेत्र अपने नैसॢगक सौंदर्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। गोरी नदी का उद्गम मिलम ग्लेशियर से ही होता है। मिलम ग्लेशियर को देखने के लिए हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। सड़क बन जाने से सैलानी मुनस्यारी से वाहन से सीधे मिलम पहुंच सकेंगे। चीन सीमा पर निॢमत तवाघाट-लिपुलेख मार्ग, तवाघाट-तिदांग मार्ग और निर्माणाधीन धापा-मुनस्यारी मार्ग से 1962 से पूर्व भारत-तिब्बत व्यापार होता था। लिपुलेख से व्यापारी पैदल ही तिब्बत के तकलाकोट पहुंचते थे तो मिलम मार्ग से व्यापारी तिब्बत की ज्ञानिमा मंडी पहुंचते थे। एक बार फिर तीनों उच्च हिमालयी घाटियां अब चीन सीमा तक मोटर मार्ग से जुडऩे जा रही है, जो जिले की चीन से लगी 136 किमी लंबी सीमा पर सामरिक दृष्टि से मजबूती प्रदान करेंगी।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: