उत्तराखंड: बदल रहा है अपराध का ट्रेड, अब इस तरह हो रही है साइबर ठगी

 रुड़की: ऑनलाइन पेमेंट वॉलेट के बढ़ते चलन के दौर में साइबर ठगों ने भी अपना ट्रेंड बदल लिया है। अब वे बैंक खातों या डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर रकम उड़ाने की जगह क्विक रिस्पांस (क्यू आर) कोड भेज लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। बीते कुछ महीनों में रुड़की में इस तरह के कई मामले सामने आने के बाद लोगों के साथ ही पुलिस की चुनौती भी बढ़ गई है। शहर के लोगों से ठगी करने के लिए साइबर ठगों ने अब नया तरीका अपनाया है। साइबर ठग अब लोगों को क्विक रिस्पांस कोड की स्कैनिंग भेजकर खाते से रकम साफ कर रहा है।

एक महीने में एक दर्जन से अधिक ऐसे मामले

मंगलवार को भी साइबर ठगों ने पेटीएम का क्यू आर कोड भेजकर आईआईटी के प्रोफेसर के खाते से दो लाख रुपये निकाल लिए। इतना ही नहीं साइबर अपराधी अब ई मेल, व्हाट्सएप जैसे माध्यम से क्यूआर कोड भेजकर लोगों के बैंक खातों को हैक कर ठगी की कोशिश कर रहे हैं। शहर में पिछले एक महीने में एक दर्जन से अधिक ऐसे मामले हो चुके हैं। लगातार बढ़ती वारदात को लेकर हाल ही में गंगनहर कोतवाली प्रभारी राजेश साह ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की थी। इसमें बताया था कि स्मार्टफोन के बढ़ते चलन और मोबाइल ऐप व इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान के नए तरीकों से साइबर धोखाधड़ी बढ़ी है।

ठगी का तरीका और बचाव के उपाय

जालसाजों से बचने के लिए ऑनलाइन भुगतान के हर विवरण पर पूरा ध्यान देना चाहिए। लोगों को किसी तरह के प्रलोभन या बहकावे में नहीं आना चाहिए। साइबर एक्सपर्ट/एथिकल हैकर कामाक्षी शर्मा ने बताया कि सबसे पहले ये स्कैमर्स सेकंड हैंड सामान के लिए खरीददार या विक्रेता बनकर लोगों को भुगतान में आसानी के लिए एक क्यू आर कोड भेजकर स्कैन करने के लिए कहते हैं। जैसे ही रिसीवर्स कोड स्कैन करते हैं, उनके खाते से पैसे कट जाते हैं।

उन्होंने यूपीआई या अन्य वॉलेट से ऑनलाइन भुगतान करने के लिए एहतियाती उपाय सुलझाते हुए कहा कि क्यूआर कोड धन प्राप्ति के बजाय केवल भुगतान के लिए प्रयोग होता है। लोगों को अज्ञात व्यक्तियों के भेजे गए क्यूआर कोड की स्कैनिंग से बचना चाहिए। साथ ही संदिग्ध पते से आई डी, ई मेल, व्हाट्सएप और टेक्स्ट संदेशों का जवाब नहीं देना चाहिए। जानकारी रखकर और सतर्क रहकर इस तरह की ठगी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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