चाय-काफीः एक मीठा जहर

                                                              डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड

चाय एक ऐसा पेय पदार्थ है जो दुनिया भर में सबसे ज्यादा पिया जाता है. एशिया में तो चाय लगभग हर देश में पी जाती है चाय हमारी दिनचर्या में इस तरह से शामिल हो चुकी है की वर्तमान समय में विदेशों के साथ-साथ भारत में भी चाय (chaay) का प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।

लोगों में एक भ्रम है कि चाय-कॉफ़ी (chaay – coffee) पीने से शरीर तथा मस्तिष्क में स्फूर्ति उत्पन्न होती है। वास्तव में स्वास्थ्य के लिए चाय-कॉफ़ी (chaay – coffee) बहुत हानिकारक है।

अनुभवी डॉक्टरों के प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि चाय-कॉफ़ी (chaay – coffee) के सेवन से नींद उड़ जाती है, भूख मर जाती है, दिमाग में खुश्की आने लगती है तथा डायबटीज (Diabetes) जैसे रोग उत्पन्न होते हैं। एक संशोधन से ज्ञात हुआ है कि चाय के एक प्याले में कई प्रकार के विष होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य पर अपना-अपना दुष्प्रभाव डालते हैं।

चाय के एक प्याले में 18 % ‘टैनीन’ (Tenin) नामक विष होता है। इसके दुष्प्रभाव से पेट में घाव तथा गैस पैदा होते हैं।

 

यह भी पढ़े:- बागेश्वर में नहीं मिल रही मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सेवा, अपरजिलाधिकारी महोदय को सौंपा गया ज्ञापन

 

चाय में उपस्थित दूसरे विष का नाम है ‘थीन’ (Theen)। इसकी मात्रा 3 % तक होती है। इससे खुश्की होती है तथा फेफड़ों एवं दिमाग में भारीपन पैदा होता है। तीसरे विष का नाम है ‘कैफीन’ (Cafin)। इसकी मात्रा 2.75 % होती है। यह शरीर में अम्ल (Acid) बनाता है तथा गुर्दों को कमजोर करता है।

गर्म चाय (Chaay) पीते समय इसकी उड़ने वाली वाष्प आँखों पर हानिकारक प्रभाव डालती है। ‘कार्बोनिल अम्ल’ (Carbonil Acid) से एसिडिटी होती है। ‘पैमीन’ से पाचन-शक्ति कमजोर होती है। ‘एरोमोलिक’ (Aromolic) आँतों में खुश्की पैदा करता है। ‘साइनोजेन’ से अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयानक बीमारियाँ उपजती हैं। ‘आक्सेलिक अम्ल’ (Oxalic Acid) शरीर के लिए अत्यन्त हानिकारक है तथा ‘स्टिनायल’ (Stinol) नामक दसवाँ विष रक्त-विकार एवं नपुंसकता पैदा करता है।

थकान अथवा नींद आने पर व्यक्ति यह सोचकर चाय पीता है कि, ‘मुझे नयी स्फूर्ति प्राप्त होगी’ परन्तु वास्तव में चाय पीने से शरीर का रक्तचाप काफी बढ़ जाता है। इससे शरीर की माँसपेशियाँ अधिक उत्तेजित हो जाती हैं तथा व्यक्ति स्फूर्ति का अनुभव करता है। इस क्रिया से हृदय पर बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा दिल के दौरे पड़ने की बीमारी पैदा होती है।

चाय के विनाशकारी व्यसन में फँसे हुए लोग स्फूर्ति का बहाना बनाकर हारे हुए जुआरी की तरह उसमें अधिकाधिक डूबते चले जाते हैं। अपने शरीर,मन,बुद्धि तथा पसीने की कमाई को व्यर्थ में गँवा देते हैं और भयंकर व्याधियों के शिकार बन जाते हैं। वर्त्तमान समय में विदेशों के साथ-साथ भारत में भी चाय का प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।

 

यह भी पढ़े:- भारत में पिस्ता की खेती करने वाला राजस्थान देश का एकमात्र राज्य है

लोगों में एक भ्रम है कि चाय-काफी पीने से शरीर तथा मस्तिष्क में स्फूर्ति उत्पन्न होती है। वास्तव में स्वास्थ्य के लिए चाय-काफी बहुत हानिकारक है। अनुभवी डॉक्टरों के प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि चाय-काफी के सेवन से नींद उड़ जाती है, भूख मर जाती है, दिमाग में खुश्की आने लगती है तथा डायबटीज जैसे रोग उत्पन्न होते हैं।

एक संशोधन से ज्ञात हुआ है कि चाय के एक प्याले में कई प्रकार के विष होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य पर अपना-अपना दुष्प्रभाव डालते है। चाय के एक प्याले में 18 % 'टैनीन' नामक विष होता है। इसके दुष्प्रभाव से पेट में घाव तथा गैस पैदा होते हैं। चाय में उपस्थित दूसरे विष का नाम है 'थीन'। इसकी मात्रा 3 % तक होती है। इससे खुश्की होती है तथा फेफड़ों एवं दिमाग में भारीपन पैदा होता है।

तीसरे विष का नाम है 'कैफीन'। इसकी मात्रा 2.75 % होती है। यह शरीर में अम्ल (Acid) बनाता है तथा गुर्दों को कमजोर करता है। गर्म चाय पीते समय इसकी उड़ने वाली वाष्प आँखों पर हानिकारक प्रभाव डालती है। 'कार्बोनिल अम्ल' से एसिडिटी होती है। 'पैमीन' से पाचन-शक्ति कमजोर होती है। 'एरोमोलिक' आँतों में खुश्की पैदा करता है।

'साइनोजेन' से अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयानक बीमारियाँ उपजती हैं। 'आक्सेलिक अम्ल' शरीर के लिए अत्यन्त हानिकारक है तथा 'स्टिनायल' नामक दसवाँ विष रक्त-विकार एवं नपुंसकता पैदा करता है।

 

यह भी पढ़े:- लालकुआं में फूटा कोरोना बम, पुलिस कर्मियों के साथ इतने लोग पॉजिटिव

थकान अथवा नींद आने पर व्यक्ति यह सोचकर चाय पीता है कि, 'मुझे नयी स्फूर्ति प्राप्त होगी' परन्तु वास्तव में चाय पीने से शरीर का रक्तचाप काफी बढ़ जाता है। इससे शरीर की माँसपेशियाँ अधिक उत्तेजित हो जाती हैं तथा व्यक्ति स्फूर्ति का अनुभव करता है। इस क्रिया से हृदय पर बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा दिल के दौरे पड़ने की बीमारी पैदा होती है।

चाय के विनाशकारी व्यसन में फँसे हुए लोग स्फूर्ति का बहाना बनाकर हारे हुए जुआरी की तरह उसमें अधिकाधिक डूबते चले जाते हैं। अपने शरीर, मन, बुद्धि तथा पसीने की कमाई को व्यर्थ में गँवा देते हैं और भयंकर व्याधियों के शिकार बन जाते हैं।सच्चाई भी जान ले यकीन से पिस्ता एक प्रकार का मेवा है।

ड्राइ फ्रूट्स के रूप में इस्तेमाल होने वाला पिस्ता न केवल एक बेहतर स्नैक है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। एक ताजा अध्ययन के अनुसार इसका नियमित सेवन शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को नियंत्रित कर ब्लड में शुगर के लेवल को घटाता है।

 

यह भी पढ़े:- उत्तराखंड में दो और कोरोना पॉजिटिव की मौत, मचा हड़कंप

टोरंटो यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक "पिस्ता को कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद पदार्थ जैसे व्हाइट ब्रेड के साथ खाने से शरीर में कार्बोहाइट्रेड की अधिक मात्रा नहीं पहुंचती और जिसके कारण खून में शर्करा का स्तर नहीं बढ़ पाता।" शोधकर्ताओं के अनुसार भारत जैसे देश जहां लगभग चार करोड़ लोग डाइबिटीज के शिकार हैं और वर्ष 2025 तक इसके आठ करोड़ तक के आंकड़े को पार करने की आशंका है, पिस्ता का सेवन डाइबिटीज के मरीजों की संख्या को नियंत्रित कर सकता है।

 

यह भी पढ़े:- आज ही के दिन तिरंगा बना था हमारा राष्ट्रीय ध्वज

इस शोध का नेतृत्व करने वाले शोधकर्ता सिरील केनडॉल का कहना है कि "डाइबिटीज के इलाज और बचाव के लिए ब्लड में ग्लुकोज के स्तर को नियंत्रित करना जरूरी है। आमतौर पर खून में शुगर का लेवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से बढ़ता है। हमने जो अध्ययन किया है, उसके प्रारंभिक परिणामों से स्पष्ट है कि पिस्ता का सेवन शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को बढ़ने नहीं देता और परिणामस्वरूप खून में शर्करा का मात्रा नियंत्रित रहती है।

" इसके साथ ही अध्ययन में पता चला है कि पिस्ता भूख को उत्तेजित करने वाले हार्मोन को भी नियंत्रित करता है, जिससे लंबे समय तक डाइबिटीज से बचाव संभव है। गौरतलब है कि अत्याधिक भोजन करने से भी शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती है और यह डाइबिटीज को का सबसे बड़ा कारण है।

 

लेखक उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर चुके हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: