उत्तराखंड में आक्सीजन प्लांट तो बने, लेकिन अधिकांश नहीं हो सके शुरू

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बीच आक्सीजन की मांग भी तेजी से बढ़ रही रही है। सरकार अभी प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन उपलब्ध होने का दावा कर रही है।

हालांकि अधिकांश जिला अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट बन चुके हैं, लेकिन ये शुरू नहीं हो पाए हैं। ऐसे में आक्सीजन के लिए औद्योगिक क्षेत्र पर ही निर्भरता अधिक है।प्रदेश में अभी देहरादून, रुड़की और काशीपुर में निजी आक्सीजन प्लांट हैं। यही आक्सीजन अस्पालों में सप्लाई होती है। प्रदेश में बीते वर्ष कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही आक्सीजन की कमी की दिक्कत आनी शुरू हो गई थी। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने हर जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट बनाने का निर्णय लिया, लेकिन एक साल का समय मिलने के बावजूद सभी अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम नहीं हो पाए हैं। टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी और उत्तरकाशी जिलों के अस्पतालों में 60-60 लाख रुपये की लागत से आक्सीजन प्लांट तो लगे हैं, सभी बेड तक आक्सीजन भी लाइन बिछी हुई हैं, लेकिन अभी ये प्लांट संचालित नहीं हुए हैं। यहां के अस्पताल आक्सीजन सप्लाई के लिए दून की एजेंसियों पर निर्भर हैं। वहीं, कुमाऊ मंडल के ऊधमसिंह नगर में जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट शुरू हो गया है। इसकी क्षमता 60 सिलिंडर की है, जिसकी पाईपलाइन के जरिये आपूर्ति की जा रही है। चम्पावत में आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगना था, लेकिन अभी नही लग पाया। बागेश्वर में अस्पताल के पास 1.14 करोड़ की लागत से आक्सीजन जनरेशन प्लांट प्रस्तावित है, लेकिन बजट नही होने के कारण अभी तक नही बन पाया है। पिथौरागढ़ में एक सप्ताह के भीतर प्लांट स्थापित करने का दावा किया जा रहा है। अल्मोड़ा जिले के बेस चिकित्सालय में आक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी बीते वर्ष शुरू हो गई थी। पाइपलाइन बिछा दी गई है लेकिन आक्सीजन तैयार करने वाला प्लांट तैयार नहीं किया जा सका है। वहीं, नैनीताल में भी आक्सीजन प्लांट लगने की प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन यह अभी तक प्लांट तैयार नहीं हुआ है। यहां के अस्पताल आक्सीजन के लिए काशीपुर पर निर्भर हैं। सचिव स्वास्थ्य का कहना है कि अधिकांश अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लग चुके हैं, इनमें से कई शुरू हो गए हैं। शेष जल्द शुरू कर दिए जाएंगे। उनका दावा है कि फिलहाल प्रदेश में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। समूचे देश में वैश्विक महामारी कोरोना का कहर अपनी चरम सीमा पर है। दिन प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। देश के क‌ई राज्यों से ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की मौत की दुखद खबरें सुनने को मिल रही है। ऐसे में यह खबर बड़ी ही सूकून देने वाली है कि केंद्र सरकार से उत्तराखण्ड में सात नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी मिल गई है। बीते रोज मुख्यमंत्री  हुई कोरोना की समीक्षा बैठक में प्रदेश के स्वास्थ्य प्रभारी सचिव ने यह जानकारी दी। बता दें कि राज्य में इस समय इस समय आठ ऑक्सीजन प्लांट काम कर रहे हैं और अधिक आक्सीजन कंसंट्रेटर्स की व्यवस्था भी की जा रही है। इसका सही तरीके से उपयोग बहुत जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए.

उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर चुके हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

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