नोएडा प्राधिकरण: सुप्रीम कोर्ट ने कहा लानत है, हर किसी के दामन से टपकता है भ्रष्टाचार।

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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण के विरुद्ध कड़ा नेतृत्व अपनाते हुए, कहा कि प्राधिकरण के चेहरे ही नहीं, उनके आँख ,नाख ,कान  सभी से भ्रष्टाचार छलकता है। सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थापित एमराल्ड कोर्ट परियोजना मामले में प्राधिकारी के अधिकारियों का बचाव करने और फ्लैट के खरीदारों की कमियां, बताने पर शीर्ष अदालत ने व्याख्या करते हुए अपना निर्णय सुनिश्चित किया ।

बुधवार को सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के वकील रविंदर कुमार ने अथॉरिटी और अपने अधिकारियों के बचाव में यह कहा कि, इस प्रोजेक्ट में किसी प्रकार के नियम का उल्लंघन नहीं किया है।

साथ ही वह हर खरीदारों की कमाई को गिनाने में लग गए। पीठ ने कहा, कि आप डेवलपर्स की ओर से बोल रहे हो ,यह बहुत ही दुःखद है।आप का निजी नहीं,  पब्लिक अथॉरिटी हैं।

सुपरटेक के वकील विकास ने कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिन दो टावरों को गिरवाने का आदेश दिया है, उसमे नियमों का अनदेखा नहीं किया है। उन्होंने खरीदारों के नीयत पर सवाल करते हुए कहा, कि जब 2009 में उन टावरों का निर्माण शुरू कर दिया  गया था, तो वह अब तीन साल बाद हाईकोर्ट का दरवाजे पर दस्तक क्यों दे रहे है।

ऐसा लग रहा है कि,आप खरीदारों से लड़ाई लड़ रहे है।

जस्टिस शाह ने इस बात पर कहा कि, अथॉरिटी को निष्पक्ष रुख को अपनाना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि आप फ्लैट खरीदारों से जंग का एलन कर रहे हो। जवाब में कुमार ने कहा कि वह तो महज अथॉरिटी का पक्ष रख रहे हैं।

2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो टावर गिराने के लिए कहा था।

लगभग 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस हाउसिंग सोसायटी को दो टावर गिराने का आदेश दिया था। और साथ ही इससे जुड़े सभी अथॉरिटी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

 

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