किन्नौर हादसे में हल्द्वानी से आ रही बस पर गिरा पहाड़,10 की मौत।

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 ऋषिकेश और बदरीनाथ का राजमार्ग यातायात के लिए खोल दिया गया है, लेकिन खतरा अभी भी है,लेकिन मार्ग अभी भी लोगों के लिए संकट बना हुआ है।यातायात का मार्ग पिछले दो दिनों  पहाड़ी से गिर रहे बोल्डरों के कारण बंद किया गया था, लकिन यहां के हादसों के कारण कई लोगों की जान जा चली गयी है। अतः प्रशासन को हिमाचल के किन्नौर हादसे से सबक लेना चाहिए।

इस मार्ग पर देवप्रयाग, तोताघाटी और शिव मूर्ति ऐसे नए भूस्खलन क्षेत्र बने हुए हैं, जो कभी भीतड़क जाते हैं, जिसकी वजह से मार्ग तो बंद हो ही जाता है,और साथ ही  लोगों की जान भी खतरे में रहती है, हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज सुंदरियाल की जान ऐसे ही पहाड़ी के गिरने से हो गई थी।

इस कारण लोक निर्माण विभाग के सहायक अधिशासी अभियंता बीएल द्विवेदी का कहना यह है, कि पहाड़ी से मलबा आने के बाद विभाग की पूरी कोशिश रहती है कि मार्ग को जल्द से जल्द खोल दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि मार्ग में भूस्खलन जोन पर ट्रीटमेंट का कार्य टीएचडीसी का है. टीएचडीसी को ही इसका मूल्यांकन  करना होता है।

सड़क परिवहन मंत्रालय का अप्रूवल मिलते ही भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट का कार्य शुरू किया जाएगा.

ऋषिकेश और बदरीनाथ नेशनल हाईवे-58 को गढ़वाल कीजीवन रक्षक पेटी कहा जाता है, यह राष्ट्रीय राजमार्ग टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों को जोड़ती है। इसी हाईवे पर देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, विष्णुप्रयाग और बदरीनाथ धाम के साथ अन्य गांव आते हैं।

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