क्या आप जानते है सर्दियों में फलों का राजा है अमरूद

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड

राजकुमार `दिनकर' आम को फलों का राजा कहा जाता है। जाहिर है आम में अपार गुण होंगे और स्वाद में तो उसका कोई सानी ही नहीं है। लेकिन इस आम को भी अपने गुणों और स्वाद से जो फल मात कर देता है, उसे अमरुद्ध या अमरूद कहते हैं। अमरुद्ध का मतलब है जो आम के गुणों को रोक दे। दरअसल अमरूद अमरुद्ध का जनमानस में स्वीकार नाम है। अमरूद पूरे देश में पाया जाता है और यह करीब-करीब हर मौसम में मिलता है। गर्मी हो या बारिश। सर्दी का मौसम हो या बसंत का। बाजार में ढूंढ़ने पर अमरूद मिल ही जाते हैं। लेकिन सर्दियों के अमरूद की फसल सर्वश्रेष्" होती है। अमरूद में विटामिन सी और शर्करा भरपूर मात्रा में पायी जाती है। अमरूद में पेक्टिन भी अच्छी खासी मात्रा पायी जाती है। इसलिए सेहत के जानकार हर मौसम में अमरूद खाने की सलाह देते हैं। अमरूद को किसी भी तरीके से खाया जा सकता है।

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इसे बीजों के साथ खाने से पेट साफ रहता है। वैसे अमरूद को कच्चे में भी खा सकते हैं और फल के पक जाने में भी खाते हैं। अमरूद की स्वादिष्ट चटनियां भी बनती हैं और जेली व मुरब्बा भी। आजकल तो अमरूद का इस्तेमाल पनीर बनाने में भी किया जाता है। अमरूद खाने के बहुत सारे फायदे हैं। अमरूद एक हाई एनर्जी फ्रूट है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। ये तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन बी-9 शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को बेहतर बनाने का काम करता है। नियमित रूप से अमरूद खाने से इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नाशियम दिल और मांसपेशियों को दुरुस्त रखते हैं जिससे कई किस्म के रोगों से बचाव होता है। अमरूद से रोग फ्रतिरोधक क्षमता में भी जबरदस्त वृद्धि होती है। अमरूद के नियमित सेवन से सर्दी जुकाम जैसी समस्याओं से पाला नहीं पड़ता। अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन ए और ई आंखों, बालों और त्वचा को पोषण देता है। अमरूद में मौजूद लाइकोपीन नामक फाइटोन्यू, ट्रियएंट्स शरीर को कैंसर और ट्यूमर के खतरे से बचाने में सहायक होते हैं। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन शरीर को त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाता है। अमरूद का नियमित खाने से कब्ज की समस्या नहीं रहती। फल के साथ ही अमरूद की पत्तियों का सेवन भी फायदेमंद होता है विशेषकर अगर मुंह के छालों में। अमरूद मेटाबॉलिज्म को सही रखता है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्राल का स्तर नियंत्रित रहता है। कच्चे अमरूद में पके अमरूद की अपेक्षा विटामिन सी अधिक पाया जाता है। इसलिए कच्चा अमरूद खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। अमरूद में फाइबर की मात्रा भी अच्छी खासी होती है। इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत उपयोगी फल है। नॉर्मल थायरॉइड में भी डॉक्टर अमरूद खाने की सलाह देते हैं। अगर लगातार या अकसर सर्दी-जुकाम की समस्या बनी रहती है तो अमरूद का सेवन फायदेमंद होता है। अमरूद में पायी जाने वाली विटामिन ए और ई आंखों, बालों और त्वचा को पोषण देती हैं। अमरूद कैंसर से बचाव  करता है क्योंकि इसमें मौजूद लाइकोपीन नामक फाइटो न्यू ट्रियएंट्स शरीर को कैंसर और ट्यूमर के खतरे से बचाने में सहायक होते हैं। बॉक्स गरीबों का सेब है अमरूद अमरूद का वानस्पतिक नाम- सीडियम ग्वायवा है। वास्तव में अमरूद की फ्रजाति सीडियम, जाति ग्वायवा, कुल मिटसी है। यह एक फल देने वाला वृक्ष है। वैज्ञानिकों का विचार है कि अमरूद की उत्पति अमरीका के उष्ण कटिबंधीय भाग तथा वेस्टइंडीज में हुई है। लेकिन भारत की जलवायु में अमरूद इतना घुल मिल गया है कि कोई भी यह मानने को तैयार नहीं हो सकता कि यह मूलरूप से भारतीय फल नहीं है। दरअसल भारत में अमरूद की भरपूर खेती की जाती है। अमरूद भारत में पहली बार 17वीं शताब्दी में आया। चूंकि इसकी खेती पूरे हिंदुस्तान में बड़े पैमाने पर होती है, इसलिए यह जाड़े के मौसम में बहुत सस्ता हो जाता है, जिससे कि गरीब से गरीब आदमी भी इसे भरपूर खा सकता है। इसके स्वाद और खूबसूरती को देखते हुए इसे निर्धनों का सेब भी कहते हैं। अमरूद की पैदावार के लिए गर्म तथा शुष्क जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त होती है। यह गर्मी तथा पाला दोनो सहन कर सकता है। केवल छोटे पौधे ही पाले से फ्रभावित होते हैं। यह हर फ्रकार की मिट्टी में उपजाया जा सकता है, परंतु बलुई दोमट इसके लिए आदर्श मिट्टी है। भारत में अमरूद की फ्रसिद्ध किस्में इलाहाबादी सफेदा, लाल गूदेवाला, चित्तीदार, करेला, बेदाना तथा अमरूद सेब हैं। अमरूद का फ्रसारण अधिकतर बीज द्वारा किया जाता है, परंतु अच्छी जातियों के गुणों को सुरक्षित रखने के लिए आम की भांति भेटकलम (इनाचिंग) द्वारा नए पौधे तैयार करना सबसे अच्छी रीति हैं। बीज मार्च या जुलाई में बो देना चाहिए। वानस्पतिक फ्रसारण के लिए सबसे उत्तम समय जुलाई अगस्त है। अमरूद के पौधे 20 फुट की दूरी पर लगाए जाते हैं। अच्छी उपज के लिए दो सिंचाई जाड़े में तथा तीन सिंचाई गर्मी के दिनों में करनी चाहिए। गोबर की सड़ी हुई खाद या कंपोस्ट, 15 गाड़ी फ्रति एकड़ देने से अत्यंत लाभ होता है। स्वस्थ तथा सुंदर आकर का पेड़ फ्राप्त करने के लिए आरंभ से ही डालियों की उचित छंटाई (फ्रूनिग) करनी चाहिए। अमरूद का एक पेड़ लगभग 30 वर्ष तक भली भांति फल देता है और फ्रति पेड़ 500-600 फल फ्राप्त होते हैं। कीड़े तथा रोग से वृक्ष को साधारणतः कोई विशेष हानि नहीं होती। अमरूद मी"ा और स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ कई औषधीय गुणों से भरा हुआ है। ठंड के मौसम में फल बाजार की रौनक बढ़ाने वाला ताजा मीठा अमरूद आपके लिए बेहतद फायदेमंद है। यह आपके स्वास्थ्य के लिए तो फायदेमंद है ही, सुंदरता के लिए भी इसके लाभ बेमिसाल हैं। अमरूद खाने में  जितना स्वादिष्ट होता ही है, सेहत के लिए भी उतना ही उपयोगी होता है। खासकर ठंड के मौसम में अमरूद खाने के कई फायदे हैं । अमरूद  में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है ।अमरूद का नियमित सेवन करने से सर्दी जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है और इसमें मौजूद विटामिन ए और ई आंखों, बालों और त्‍वचा को पोषण देता है। अमरूद मैग्नीज का बहुत बढ़िया स्रोत है जो हमारे शरीर को दूसरे भोजन से मिलने वाले महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को ग्रहण करने में मदद करता है। अमरूद में मौजूद पोटैशियम रक्त चाप के स्तर को सामान्य बनाए रखता है। दिल और मांसपेशियों को दुरुस्‍त रखकर उन्‍हें कई बीमारियों से बचाता है। अमरूद में 80 फीसदी पानी होता जो त्वचा की नमी बरकरार रखता है। इसके अलावा, आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अमरूद में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है।अमरूद में पाया जाने वाला लाइकोपीन नामक पोषक तत्व शरीर को कैंसर और ट्यूमर के खतरे से बचाने में मददगार होते हैं। अमरूद में बीटा कैरोटीन होता है जो शरीर को त्‍वचा संबंधी बीमारियों से बचाता है।अमरूद को इसके बीजों के साथ खाना बहुत लाभदायक होता है, जिसके कारण पेट साफ रहता है।अमरूद मेटाबॉलिज्‍म को सही रखता है जिससे शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर नियंत्रित रहता है। यह वजन घटाने में भी मददगार है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है। एक अमरूद में 112 कैलोरी होती है जिससे बहुत देर तक भूख नहीं लगती। डायबिटिज के रोगियों के लिए तो यह रामबाण है।इसका नियमित सेवन करने से वजन कम होता है और पाचन शक्ति बढ़ती है। अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है तो अमरूद की कोमल पत्त‍ियों को चबाना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इसकी पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल क्षमता होती है जिसको चबाने से दांतों का दर्द भी कम हो जाता है। अमरूद त्वचा की डैमेजे सेल की मरम्मत करके उन्हें स्वस्थ बनाए रखता है जिससे झुर्रियां या झाइयां भी नहीं पड़तीं। अमरूद की पत्त‍ियों को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे और सूजन कम हो जाती है।अमरूद दांतों और मसूढ़ों को मजबूत बनाता है। अमरूद की पत्तियां चबाने से मुंह के छाले में राहत मिलती है। अमरूद का रस घाव को जल्दी भरने का काम करता है। अमरूद को सर्दियों में फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता है। नाशपाती के आकार का अमरूद बाहर से देखने पर हरे तथा पीले रंग का और अंदर से सफेद और लाल रंग का होता है। यह अपने कुरकुरे और मीठे स्वाद के कारण जितना पसंदी किया जाता है, उससे भी अधिक इसके गुणों के कारण खाया जाता है, अमरूद स्वास्थ्य के लिए एक अद्भुत फल है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट और स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, इसीलिए इसे सुपर फल का दर्जा दिया गया है। अमरूद विटामिन ए, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, लाइकोपीन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, तांबा, मैगनीज, फाइबर, निकोटिन, आयरन, कैल्शियम जैसे कई पौष्टिक तत्वों का खजाना है। अध्ययनों से साबित हो चुका है कि अमरूद में संतरे की तुलना में विटामिन सी और सेब-केले की तुलना में पोटैशियम कहीं अधिक मात्रा में पाया जाता है। अमरूद को संतुलित पोषण प्रोफाइल माना गया है। अमरूद में मौजूद विटामिन सी शरीर में पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है। कैंसर रक्षक लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट और कैरोटीन से भरपूर अमरूद स्तन, फेफडमें और मुंह के कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में प्रभावशाली है। फलों के राजा आम को भी जो मात दे कहते हैं उसे अमरूद सर्दियों में अमरूद खाने से सर्दी और जुखाम ठीक हो जाता है। वहीं अमरूद में विटामिन ए और ई पाया जाता है जिस वजह से ये आपकी त्वचा के लिए भी लाभदायक होता है। इसके साथ आंखें, त्वचा और बालों को भी अच्छा पोषण मिलता है।
अमरूद ऐसा फल है जो देश के ज्यादातर हिस्सों में पाया जाता है. देश में उगाए जाने वाले फलों में क्षेत्रफल और उत्पादन के लिहाज से अमरूद का चौथा स्थान है. उत्तराखंड से ले कर कन्याकुमारी तक इस की बागबानी की जाती है. गुणों की भरमार वाले इस फल की तुलना सेब से की जाती है. अमरूद की बागबानी न केवल आसानी से हो जाती है, बल्कि इस के जरीए अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है. अमरूद का उत्पादन देश में सब से ज्यादा उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक व आंध्र प्रदेश में होता है. अमरूद की बागबानी सभी तरह की जमीन पर की जा सकती है. वैसे गरम और सूखी जलवायु वाले इलाकों में गहरी बलुई दोमट मिट्टी इस के लिए ज्यादा अच्छी मानी जाती है. चटनी, जैम, हलवे और सब्जी का स्वाद चखा हो। फायदेमंद अमरूद की स्वादिष्ट बर्फी भी है.। सरकार के पास योजनाऐं तो बहुत हैं पर उनका सीधा और समय पर फायदा नहीं मिल पाता, इसके साथ-साथ तकनीकि मदद न के बराबर है।’ उत्तराखंड का नाम जहन में आते ही पहाड़ों के खाली होते गांवों की तस्वीरें हर उत्तराखंडी के सामने आ जाती हैं। सरकारी फाइलों में, गोष्ठियों में पलायन को रोकने की तमाम बातें कैद हैं लेकिन सच ये है कि पहाड़ों पर युवा बेहतर जिंदगी और काम की तलाश में लगातार मैदानों की तरफ रुख कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच कभी कभी ऐसी तस्वीरें भी सामने आती हैं जो वीरान होते पहाड़ों पर फिर खुशहाली के लौटने की उम्मीद जगाती है। ऐसी ही एक तस्वीर है 25 साल की रंजना रावत। इसकी बेहतर ब्रांडिंग के जरिये हम इनकी पहचान बनाने में सफल हुए तो इससे इनके उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती मिलेगी सरकारी व स्थानीय सहयोग की बड़ी आवश्यकता है. तो निश्चित तौर पर पहाड़ की पुरानी रौनक वापस लौट सकती है। उत्तराखंड के उत्पादकों को ये कब तक मिलेंगी खुशहाल होंगे, यह भविष्य के गर्त में छिपा है।

लेखक उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर चुके हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरत  हैं।

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