चिया बीज और इसके स्वास्थ्य लाभ

                                                           डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड

मैक्सिकन चिया या साल्विया हर्पेनिका एक प्रकार के ऋषि का वर्णन करती है, जो कि लेबियाट्स में गिना जाता है और मैक्सिको का मूल निवासी है। पौधे के बीजों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है, यही वजह है कि साल्विया हेंपिका को एक फसल के रूप में उगाया जाता है। यह एक शाकाहारी और वार्षिक है, जो डेढ़ मीटर से अधिक की ऊँचाई तक पहुंच सकता है और सभी ऋषि प्रजातियों की तरह सामने की ओर पत्ते हैं। नकली फूलों में उगने वाले छोटे फूल सफेद या नीले दिखाई दे सकते हैं। लैटिन नाम साल्विया हर्पेनिका को वनस्पति विज्ञानी कार्ल वॉन लिनिअस द्वारा पेश किया गया था, लेकिन कुछ हद तक भ्रामक है क्योंकि स्पेनिश ऋषि इस पौधे से संबंधित एक प्रजाति का वर्णन करते हैं। इसलिए, मैक्सिकन चिया नाम जर्मन भाषी देशों में प्रबल था, नाहुतल भाषा से उधार लिया गया था। चिया हिस्पैनिक समय से पहले इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में बताती है कि मेक्सिको ने बीज की संपत्ति को बल दाता के रूप में इस्तेमाल किया। संयंत्र केवल गर्म और विशेष रूप से सूखे क्षेत्रों में पनपता है, क्योंकि नमी और बारिश उन्हें सड़ांध और कवक रोगों के लिए अतिसंवेदनशील बनाते हैं। वसंत में बुवाई के बाद, वे सितंबर में निविदा फूल दिखाते हैं, इससे पहले कि शरद ऋतु में बीज काटा जा सकता है। चिया बीज को वैज्ञानिक रूप से साल्विया हर्पेनिका के रूप में जाना जाता है। ये बीज मुख्य रूप से मैक्सिको में पाई जाते हैं। ये बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट और कैल्शियम से भरपूर होते हैं । यही कारण है कि चिया बीज को सुपरफूड के श्रेणी में रखा गया है।चिया सीड मिंट प्रजाति का होता है।

 

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आपको जानकर हैरानी होगी कि कीड़ों को पुदीना पसंद नहीं होता। इसलिए, कीटनाशकों के उपयोग के बिना ही इस पौधे को उगाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि सेंट्रल मैक्सिको में एज्टेक नाम की प्रजाति रहती थी, जो मेसोअमेरिकन कल्चर को मानते थे। उनके बीच चिया बीज इतने प्रचलित थे कि वो लोग उसे मुद्रा के रूप में भी इस्तेमाल करते थे। चिया बीज के पौधे थोड़े अलग तरह के होते हैं और इन्हें विशिष्ट रूप से बढ़ने की आवश्यकता होती है। इसलिए, इन्हें 23 डिग्री उत्तर और 23 डिग्री दक्षिण अक्षांश के बीच उगाया जाता है। चिया की खोज 1990 के दशक में डॉ. वेन कोट्स ने की थी। उन्होंने अर्जेंटीना में ऐसी फसलों (cash crop) की तलाश में परियोजना का नेतृत्व किया था, जो क्षेत्र में किसानों को लाभान्वित कर सकता था। चिया बीज के फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते हैं। चिया सीड में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। इसलिए, चिया बीज के जरिए इन स्वस्थ फैटी एसिड का सेवन करने का सबसे आसान तरीका है। चिया बीज के एक सर्विंग में पांच ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। साथ ही इसमें घुलनशील फाइबर होता है। आजकल हम जैसी जीवनशैली जी रहे हैं, उससे वजन बढ़ना आम बात है। बाद में यही बढ़ता वजन कई बीमारियों का कारण बन जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप शुरू से ही वजन पर ध्यान दें। इस काम में चिया सीड आपकी मदद कर सकता है। साथ ही अपनी डाइट पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है।चिया सीड में फाइबर मौजूद होता है। इसके सेवन से पेट काफी देर तक भरा-भरा महसूस होगा। ऐसे में कुछ और खाने की इच्छा कम ही होती है, जिससे वजन घट सकता है।

 

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अध्ययन से पता चला है कि सुबह नाश्ते के बाद स्नैक्स के रूप में चिया बीज का सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में थोड़ी देर के लिए भूख को शांत कर सकता है ।एक अध्ययन के अनुसार, चिया बीज फैट कम करने में अहम भूमिका निभाता है और ब्लड ग्लूकोज व लिपिड प्रोफाइल में सुधार लाता है. असंतुलित खानपान और दिनचर्या के कारण हमारा शरीर बीमारियों का घर बन गया है। आज के दौर में कम उम्र में ही लोग कई बीमारियों से घिर जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल उन्हीं बीमारियों में से एक है। कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है, एलडीएल (लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन), जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल माना गया है और एचडीएल (हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) जो अच्छा होता है। जब शरीर में एलडीएल बढ़ने लगता है, तो धमनियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। इससे दिल का दौरा और ह्रदय से जुड़ी अन्य बीमारियां होने का अंदेशा बढ़ जाता है।अगर चिया बीज का सेवन किया जाए, तो उसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करके, अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। साथ ही कोरोनरी हार्ट डिजीज (coronary heart disease) का खतरा कम हो सकता है। यह डिस्लिपिडेमिया (dyslipidemia) को बेहतर करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, यह ट्राइग्लिसराइड (triglycerides) जो कि खून में एक प्रकार का फैट होता है, उसे भी कम करता है। यह अनियमित दिल की धड़कन, निम्न रक्तचाप और कई अन्य समस्याओं को कम कर सकता है। आजकल महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अगर आपको इससे बचना है, तो अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा।अगर आप चिया बीज को अपनी डाइट में शामिल करती हैं, तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

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यूसीएसएफ मेडिकल सेंटर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, चिया बीज में अल्फा-लिनोलिक एसिड होता है, जो स्तन कैंसर को रोकने में मदद कर सकता है। यही बात ओमेगा-3 फैटी एसिड पर भी लागू होती है। अन्य पोषक तत्वों की तरह प्रोटीन भी हमारे शरीर के लिए जरूरी है। यह हड्डियों, मांसपेशियों व इम्युनिटी आदि के लिए जरूरी है। इसलिए, हर रोज अपनी डाइट में प्रोटीन शामिल करें। चिया बीज प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है और अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल करेंगे, तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा। ब्राजील में हुए एक अध्ययन के अनुसार, चिया बीज में अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है। इसके प्रयोग से चूहों के लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल के स्तर) में भी सुधार हुआ था। चिया बीज में 19% प्रोटीन होता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन के अनुसार, प्रोटीन युक्त आहार भूख को कम कर सकता है । चिया बीज में सभी आवश्यक अमीनो एसिड के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है। शरीर के साथ-साथ त्वचा का खास ख्याल रखना भी जरूरी है। वक्त के साथ-साथ त्वचा नमी खोने लगती है और प्रदूषण व धूल-मिट्टी का भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में त्वचा को सही रखने के लिए सिर्फ क्रीम, लोशन और घरेलू उपाय ही नहीं, बल्कि सही खान-पान भी जरूरी है। आप अपनी त्वचा के लिए चिया बीज का सेवन कर सकते हैं। चिया बीज में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड त्वचा के रूखेपन और सूजन को कम कर सकता है। एक और अध्ययन के अनुसार, ओमेगा-3 एस यूवी किरण से त्वचा की रक्षा करने में मदद करता है। चिया सीड के सेवन से त्वचा हाइड्रेट भी रहती है। इन बीजों के 100 ग्राम में लगभग 485 कैलोरी, 31 ग्राम वसा और 42 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता हैं।

 

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बीजों में 22 जरुरी अमीनो एसिड में से 18 इनमे होते हैं। पोषक मूल्य चिया बीज के एक एकल सेवारत पर आधारित हैं। उत्तराखंड के टिहरी जिले के क्यार्की गांव में इटली मूल के निवासी इलियास मार्टिन ने विदेशी किस्म के सुपर फूड चिया की खेती का परीक्षण किया है। उन्होंने गांव में करीब छह नाली भूमि पर चिया की खेती का सफल परीक्षण किया है। इटली मूल के निवासी इलियास मार्टिन ने क्यार्की फाउंडेशन के बैनर तले तीर्थनगरी के समीपवर्ती गांव क्यार्की में इसी वर्ष फरवरी 2017 में सुपर फूड चिया की खेती की शुरुआत की थी। मार्टिन व उनके स्थानीय सहयोगियों की मेहनत रंग लाई। उन्होंने प्रयासों से गांव में करीब छह नाली भूमि पर चिया की खेती का सफल परीक्षण किया है। मार्टिन ने बताया कि इटली में चिया की बुवाई जून में की जाती है, और नवंबर में यह फसल तैयार हो जाती है। चिया के बीज का इस्तेमाल कई तरह से खाने के रूप में किया जा सकता है। जैसे इसे उबालकर सलाद के रूप में, दलिया की तरह पकाकर व कच्चा बीज भी खाया जाता है। खास बात यह है कि चिया की खेती भारत में कहीं भी नहीं की जाती है। उन्होंने बताया कि यहां की जलवायु इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है। लिहाजा चिया की खेती को लेकर लोग अभी जागरूक नहीं हैं। क्यार्की फाउंडेशन के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इलियास मार्टिन जब ऋषिकेश घूमने आए थे, तो उन्हें यहां की जलवायु चिया की खेती के अनुकूल लगी, लिहाजा उन्होंने तीर्थनगरी के समीपवर्ती क्यार्की गांव को इसकी खेती के लिए उपयुक्त पाया और गांव के लोगों की मदद से चिया की खेती का प्रयोग किया। बताया कि यह एक रिच फूड है, जोकि अपने गुणों के कारण धीरे-धीरे लोगों में अपनी पहचान बना रहा है।

 

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चिया काफी महंगा फूड है, इसकी एक किलोग्राम बीज की कीमत लगभग 1500 से 2000 रुपये है। लिहाजा यह फूड अभी लोगों की पहुंच से दूर है। अंकित रावल का मानना है कि यहां चिया की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को प्रमोट करना चाहिए। ऐसा हुआ तो इसका उत्पादन प्रचुर मात्रा में हो सकता है इस खेती के लिए लोग आगे आते हैं और सरकार का सहयोग मिलता है, तो भविष्य में उत्तराखंड के किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है। क्योंकि यह किसानों के लिए अच्छी आय का स्रोत बन सकता है। इससे कि पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी और सरकार को भी अच्छा राजस्व प्राप्त होगा। भारत में भी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और हम भी अब धीरे-धीरे ही सही लेकिन रसायन मुक्त और जैविक (आर्गेनिक) खाने की मांग में वृद्धि होते देख रहे हैं. जैविक खाद्य उत्पादों का अनुमानित बाजार करीब 1,500 करोड़ रुपये का है और अगले तीन सालों में इसके दोगुना होकर 3,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबलूएचओ) की 2018 कर एक रपट से पता चलता है कि 2020 तक होने वाली सभी मौतों में से 75 प्रतिशत के पीछे गैर-संक्रमणीय पुरानी बीमारियां प्रमुख कारण होगा. हालांकि अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इनमें से अधिकतर को रोका जा सकता है. साथ ही स्वस्थ आहार और संतुलित जीवन शैली पर ध्यान केंद्रित करते हुए मूल कारण पर नजर डालने की भी आवश्यकता है. ‘हम अपने भोजन में हर चीज को उबालकर प्रयोग करते हैं. भारत में बड़े स्तर पर पोषण संक्रमण है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों की घटनाओं में भी वृद्धि देखने को मिली है. कुपोषण, ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों में एक सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है. सुपरफूड (अपने उच्च पोषण मूल्य के लिये मशहूर) दोनों ही स्थितियों को हल करने वाले समाधानों में से एक है.

 

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लेखक द्वारा उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर का अनुभव प्राप्त हैं, वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में है.

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