बेनिनकेसा हिस्पिडा होता है पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्य वर्धक!

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड

पेठा या कुष्माण्ड वानस्पतिक नाम  बेनिनकेसा हिस्पिडा एक बेल पर लगने वाला फल है, जो सब्जी की
तरह खाया जाता है। यह हल्के हरे वर्ण का होता है और बहुत बड़े आकार का हो सकता है। पूरा पकने पर
यह सतही बालों को छोड़कर कुछ श्वेत धूल भरी सतह का हो जाता है। इसकी कुछ प्रजातियां १-२ मीटर
तक के फल देती हैं। इसकी अधिकांश खेती भारत सहित दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में होती है।
इससे भारत में एक मिठाई भी बनती है, जिसे पेठा (मिठाई) ही कहते हैं। कुष्मांड या कूष्मांड का फल
पेठा, भतुआ, कोंहड़ा आदि नामों से भी जाना जाता है। यह लता वार्षिकी, कठिन श्वेत रोमों से आवृत 5-6
इंच व्यास के पत्तों वाली होती है। पुष्प के साथ अंडाकार फल लगते हैं। कच्चा फल हरा, पर पकने पर
श्वेत, बृहदाकार होता है। यह वर्षा के प्रारंभ में बोया जाता है। शिशिर में फल पकता है। बीज चिपटे होते
हैं। इसके एक भेद को क्षेत्रकुष्मांड, भतुआ या कोंहड़ा कहते हैं, जो कच्ची अवस्था में हरा, पर पकने पर
पीला हो जाता है। कुष्मांड खेतों में बोया जाता अथवा छप्पर पर लता के रूप में चढ़ाया जाता है। कुष्मांड
भारत में सर्वत्र उपजता है। इसके सभी भाग-फल, रस, बीज, त्वक्‌ पत्र, मूल, डंठल-तैल ओषधियों
तथा अन्य कामों में प्रयुक्त होते हैं। इसके मुरब्बे, पाक, अवलेह, ठंढाई, घृत आदि बनते हैं। इसके
फल में जल के अतिरिक्त स्टार्च, क्षार तत्व, प्रोटीन, मायोसीन शर्करा, तिक्त राल आदि रहते हैं।
फलों के खाद्य अंश के विश्लेषण से आर्द्रता 94.8; प्रोटीन 0.5; वसा (ईथर निष्कर्ष) 0.1; कार्बोहाइड्रेट
4.3; खनिज पदार्थ 0.3; कैल्सियम 0.1; फास्फोरस 0.3% लोहा 0.6 मि.ग्रा./,100 ग्र. विटामिन सी,
18 मिग्रा. या 100 ग्रा.।कुम्हड़ा के बीजों का उपयोग खाद्य पदार्थों के रूप में किया जाता है। इसके
ताजे बीज कृमिनाशक होते हैं। इसलिए इसके बीजों का उपयोग औषधि के रूप में होता है।
इसे झारखण्ड/ बिहार  में जेठ महीना के आरंभ होने से पहले धुला हुआ उरद दाल, थोड़ा चना दाल, गर्म
मसाला, के साथ कद्दूकस किया हुआ कुष्मांड (भतुआ) को मिला कर तेज धुप में सुखा
कर  अदौरी  (बड़ी) बनाया जाता है। जिसे सालभर डब्बाबंद रख कर लोग खाते हैं। पेठा में पाया जाने
वाला आहार फाइबर, हमारे पाचन तंत्र व पाचन से संबंधित कार्यों के समुचित संचालन व
वृद्धि करने में सहायक होता है। यह आहार फाइबर, पाचन तंत्र के द्वारा निकलने वाले मल
के निष्कासन में सहायता करता है। यह आंतों की सूजन, डाइवर्टीक्युलाइटिस, कोलन कैंसर

जैसे पाचन से संबंधित रोगों को रोकने में उपयोगी होता है। पेठा में उपस्थित विटामिन सी एक
अच्छा एंटी-ऑक्सीडेंट है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में मुक्त कणों, प्रदूषित और विषैले पदार्थों के कारण
होने वाले क्षति पर रोक लगाता है। शरीर में इन मुक्त कणों के निर्माण से गठिया, कैंसर और हृदय रोग
जैसे स्वास्थ्य जनित रोगों को बढ़ावा मिलता है। जब हमारा आहार या भोज्य पदार्थ धुआं, तंबाकू या
विकिरण के संपर्क में आता है तब शरीर में इन मुक्त कणों का निर्माण होता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए
बहुत हानिकारक होते हैं।सफेद कद्दू या पेठा में फाइबर की उच्च मात्रा व कम कैलोरी के कारण वजन कम
करने वाले उपयुक्त आहार के रूप में इसकी तारीफ की जाती है। सफेद कद्दू में उपस्थित पोषक तत्व और
खनिजों का उत्कृष्ट योग, शरीर में एक अच्छे चयापचय क्रिया और मांसपेशियों की वृद्धि को बढ़ाने में
उपयोगी होता है। इसके सब्जी के रूप में सेवन से, फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण आपको काफी
समय तक पेट भरा हुआ प्रतीत होता है, जिससे आपको भूख कम लगती है, और अपना वजन कम करने के
प्रयास में प्रभावकारी असर देखने को मिलता है।स्ट्रोक की समस्या के लिए पेठा का सेवन बहुत गुणकारी
होता है, क्योंकि पेठा में विटामिन सी की मात्रा 19.11% होती है, जो स्ट्रोक के खतरे की आशंका को कम
करने में बहुत सहायक होती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन द्वारा किए एक अध्ययन से,
यह जानकारी मिलती है कि वे लोग जो समुचित मात्रा में विटामिन सी का सेवन करते हैं, उनमें स्ट्रोक की
संभावना में 42% तक की कमी पाई गई थी। सफ़ेद पेठा में उपस्थित आयरन, मस्तिष्क के लिए आवश्यक
ऑक्सीजन को पहुंचाने का कार्य या परिवहन में सहायता करता है, जो मस्तिष्क के समुचित कार्यों का
संचालन करता है। इस आयरन की कमी से, स्मरण शक्ति व स्मृति को क्षति तथा अन्य मानसिक
समस्याएं होती है। तथ्यों के अनुसार शरीर के कुल ऑक्सीजन का 20% मस्तिष्क द्वारा उपयोग किया
जाता है इसलिए छोटे बच्चों और शिशुओं में जल्दी सीखने में होने वाली समस्याओं का कारण आयरन की
कमी हो सकता है, इस वजह से मस्तिष्क के कार्यों के उचित संचालन व रखरखाव के लिए पेठा का सेवन
लाभदायक होता है। पेठे के जूस से प्राप्त होने वाला, घुलनशील फाइबर, शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल के
अवशोषण में कमी करने में मदद करता है, और इस प्रकार शरीर में संपूर्ण कोलेस्ट्रॉल संग्रहण की मात्रा को
कम कर देता है। यह कॉलेस्ट्रोल से बनने वाले पित्त को भी समाप्त करने में उपयोगी होता है, इसलिए पेठा
या इसके जूस का सेवन ह्रदय को स्वस्थ रखने में काफी उपयोगी होता है। पेठा में माइग्रेन की समस्या में
राहत पहुंचाने के गुण होते हैं। पेठा में वैसे तो कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, किंतु इस में उपस्थित,
विटामिन बी 2 माइग्रेन के कारण होने वाले सिर दर्द को ठीक करने में काफी उपयोगी होता है। विभिन्न
अध्ययनों से यह ज्ञात होता है कि विटामिन बी2 के कारण, माइग्रेन और आधासीसी(अर्ध शीर्ष) सिरदर्द में
होने वाले दर्द और उसके लक्षणों की तीव्रता या आवृत्ति में कमी होती है। पेठा के सेवन से प्राप्त विटामिन बी
2 माइग्रेन में होने वाले, सिरदर्द के समयांतराल या अवधि को भी कम करने में सहायक होता है।पेठा में
पाया जाने वाला विटामिन बी 2 हमारे शरीर के तंत्रिका, मस्तिष्क, हार्मोन व पाचन से संबंधित उचित
कार्यों के लिए अति आवश्यक तत्व है। हमारे शरीर में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व खाद्य पदार्थों के गलत
पाचन या पाचन क्रिया में गड़बड़ी के लिए विटामिन बी 2 की कमी एक महत्वपूर्ण कारक होता है। यह

पोषक तत्वों को ऊर्जा में रूपांतरित करके हमारे शरीर को स्वस्थ चयापचय की प्रक्रिया प्रदान करने में
सक्षम होता है। इस कारण शरीर के उचित मरम्मत और विकास के लिए विटामिन बी 2 बहुत आवश्यक
होता है, इसलिए पेठा के सेवन से प्राप्त, विटामिन बी 2 हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम होता है
पेठा में मौजूद विटामिन सी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली व कार्यों यानि कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
करती है। यह जिसके कारण यह खांसी, सर्दी और फ्लू के वायरस को रोकने में बहुत उपयोगी होता है।
अध्ययनों से यह ज्ञात होता है कि पेठे में पाया जाने वाला विटामिन सी, फेफड़ों के संक्रमण और उससे
उत्पन्न होने वाले निमोनिया की संभावना को रोकने या समाप्त करने में सक्षम होता है, इसलिए पेठे का
सेवन हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए उपयोगी होता है। पेठे पूरी तरह
से प्राकृतिक होता है जिसे व्रत में आसानी से खाया जा सकता है। फलहार में पेठा भी आता है।
प्राचीन ग्रथों में पेठे को शरीर को अंदर से ताकत देने वाला और वीर्य को बढ़ाने वाला उत्तम फल
कहा गया है. जिससे आप अपने को और अपने परिवार को बीमारी से मुक्त रख सकते हो। और
डाक्टरों को देने वाली अधिक फीस से भी बच सकते है.।
लेखक द्वारा उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर का अनुभव
प्राप्त हैं, वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत है.

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